Guidelines For Covid-19 Management In Children: कोरोना संक्रमित है बच्चा तो ऐसे कराएं इलाज, केंद्र सरकार ने जारी की गाइडलाइन्स

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Guidelines For Covid-19 Management In Children
Guidelines For Covid-19 Management In Children

Guidelines For Covid-19 Management In Children: कोरोना संक्रमित है बच्चा तो ऐसे कराएं इलाज, केंद्र सरकार ने जारी की गाइडलाइन्स

Guidelines For Covid-19 Management In Children: हम सभी जानते हैं कोरोना संक्रमण (Corona Infection) की इस तीसरी लहर में बच्चे और किशोर इसकी चपेट में सबसे अधिक आ रहे हैं | इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने कुछ नए दिशा-निर्देश (New Guidelines) जारी किए हैं | इस गाइडलाइन में बच्चों और किशोरों को कोरोना संक्रमण (Corona Infection) से बचाने के लिए कुछ सुझाव के साथ ही, उन्हें दिए जाने वाले इलाज के बारे में खासतौर से बताया गया है |

चलिए जानते हैं इसके बारे में…

Guidelines For Covid-19 Management In Children

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सरकार की तरफ से 20 जनवरी को कुछ नए दिशा-निर्देश (New Guidelines) जारी किए गए हैं | सरकार ने 16 जून 2021 को जारी कुछ दिशा-निर्देश जारी किये थे ,अब उनमे कुछ बदलाव किया गया है |

इसमें सबसे महत्वपूर्ण गाइडलाइन ये है कि अगर बच्चे और किशोर कोरोना से संक्रमित होते हैं तो उन्हें कोरोना के इलाज में इस्तेमाल हो रहीं एंटीवायरस (Antivirus) दवाएं नहीं दी जाएँगी |

इसमें कहा गया है की ‘संक्रमित बच्चों की उम्र अगर 18 साल से कम है तो संक्रमण किसी भी स्तर का क्यों न हो, उन्हें रेमडेसिविर (Remdesivir), मोलनुपिराविर (Molnupiravir), फैविपिराविर (Favipiravir), फ्लूवोक्सोमाइन (Fluvoxamine) जैसी दवाएं न दी जाएं | साथ ही मानव शरीर में प्रतिरूपी एंटीबॉडी (Monoclonal Antibodies) पैदा करने वाली दवाएं, जैसे- सोट्रोविमैब (Sotrovimab), कैसिरिविमैब+ (Casirivimab+),इमडेविमैब (Imdevimab) भी उन्हें न दी जाएं.’

सरकार के कहना है की इस किस्म की दवाओं का मानव शरीर पर किस तरह का दूरगामी परिणाम होता है, यह अभी तक पता नहीं चल पाया है | इस बारे में अभी रिसर्च चल रही है | इस कारण बच्चों को ये दवाएं देने की सिफारिश सरकार नहीं करती है |

सरकार ने अपने नए दिशा-निर्देशों में यह भी कहा है कि ओमिक्रॉन (Omicron) की वजह से जो संक्रमण फैल रहा है वह अधिक गंभीर नहीं है , इसलिए बच्चों में अगर संक्रमण के लक्षण नहीं हैं या हल्के लक्षण हैं तो उन्हें घर पर (Home Isolation) ही रखकर इलाज करने की कोशिश करें साथ ही में 15 से 18 साल की आयु के बच्चों को, जितनी जल्द हो, कोरोना का टीका (Corona Vaccine)लगवाने की ज़रूरत है | इसमें कहा गया है की 5 साल तक के बच्चों को मास्क पहनने की जरूरत भी नहीं है |

सरकार ने अपने दिशा-निर्देश में कहा है की बच्चों को कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए बुखार होने पर उनके वजन के अनुरूप पैरासिटामॉल (Paracetamol) दी जा सकती है | प्रति किलोग्राम 10-15 मिलिग्राम के हिसाब से ,हर 4-6 घंटे में 1-1 गोली दी जा सकती है |अगर साथ में खांसी है तो गले को राहत देने वाला हल्का सीरप आदि दिया जा सकता है | साथ ही उन्हें दिन में 3-4 बार गरम पानी से गरारे कराने चाहिए |
पेट साफ होता रहे, इसके लिए भी मुंह से ली जाने वाली दवा (सीरप आदि) ही उन्हें दी जाए | इसके अलावा पौष्टिक आहार उन्हें अधिक से अधिक दें | इन दिशा-निर्देशों को महाराष्ट्र सरकार की ओर से बच्चों में कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के मसले पर सुझाव देने के लिए गठित कोरोना कार्यबल (Covid Task Force) की सदस्य डॉक्टर आरती किनिकर पर्याप्त बताती हैं. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’
से बातचीत में वे कहती हैं, ‘संक्रमण के हल्के लक्षणों वाले मामलों में बच्चों तो क्या, अन्य के लिए भी कोरोना का विशिष्ट इलाज देने की जरूरत नहीं है.’

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Covid 19 में किस प्रकार रखें बच्चों का ख्याल

Covid 19 से बच्चों को बचने के लिए ये बहुत ज़रूरी है की बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हों ,कोरोना के कारण बच्चों की मेंटल हेल्थ कमजोर हो रही है ,अगर आप इन सुपर फूड्स को अपने बच्चे के आहार में शामिल करते हैं तो आपके बच्चे की रोग पर्तिरोधक शक्ति बढ़ेगी और उन्हें कोरोना जैसी बीमारी से लड़ने में मदद मिलेगी |

बच्चों के लिए कोरोना महामारी का समय बहुत अधिक तनावपूर्ण रहा है, वह नियमित रूप से अपने दोस्तों और टीचर्स से नहीं मिल पाते हैं और बाहर भी नहीं खेल पाते हैं। कोरोनाकाल (corona pandemic) में सबसे ज्यादा प्रभाव अगर किसी को पड़ा है तो वह है छोटे-छोटे बच्चे, जो लगभग 2 सालों से घर में कैद हैं। ना वह स्कूल जा पा रहे हैं और ना ही अपने दोस्तों या लोगों से मिल पाते हैं। ऐसे में उनका मेंटल डेवलपमेंट बहुत कमजोर होता जा रहा है |

मानसिक दबाव के कारण (mental health) उनके दिमाग की वृद्धि और उनकी स्मरण क्षमता भी कम होती जा रही है, इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों को हमें बच्चों की डाइट में शामिल करना चाहिए, जिसका पॉजिटिव इफेक्ट उनकी मेंटल हेल्थ पर पड़े, क्योंकि कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं जिनकी मदद से हम मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे फूड आइटम्स के बारे में बताएंगे जो आपको अपने बच्चों की डाइट में नियमित रूप से शामिल करना चाहिए…

क्यों जरूरी है सही डाइट:

ओमिक्रोन का ख़तरा सबसे अधिक बच्चों पर पड़ रहा है जिसने माता -पिता की चिंता बहुत अधिक बढ़ा दी है |
आहार शारीरिक, सामाजिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इस कोरोना काल में एक बच्चे को ऐसे भोजन की आवश्यकता है जो न केवल शारीरिक विकास में सहायता करे बल्कि मस्तिष्क के अच्छे विकास में भी सहायक होना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए बच्चे की डाइट में शामिल करें ये चीजें

  • लाल और पीले रंग के फल और सब्जियां जैसे गाजर, शिमला मिर्च, पपीता आदि विटामिन ए के समृद्ध स्रोत हैं, जो एक शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट है और मेंटल ग्रोथ में मददगार होते हैं।
  • केला विटामिन बी6 और फाइटोन्यूट्रिएंट्स का अच्छा स्रोत है। यह फाइबर का भी अच्छा स्रोत है और आंत को साफ रखता है। शोध के अनुसार केला खाने से डिप्रेशन और तनाव दूर होता है और दिमाग तेज चलता है।
  • लहसुन और प्याज में अच्छे एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं जो सूजन को नियंत्रण में रखते हैं और अच्छे सेलुलर स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।
  • हरी पत्तेदार सब्जियों में पर्याप्त मात्रा में विटामिन होते हैं जैसे ए, सी, के, और कई बी जिनमें फोलेट (बी 9) शामिल हैं। यह फाइबर के साथ कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, मैंगनीज और पोटेशियम जैसे खनिजों का भी स्रोत है, इसलिए मानसिक स्वास्थ्य के लिए अपनी रेगुलर डाइट में ग्रीन सब्जियों को शामिल करें।
  • मेंटल हेल्थ बढ़ाने के साथ ही ये फूड आइटम्स बच्चों को कोरोना महामारी से भी बचाते है और उनकी इम्यूनिटी को स्ट्रॉग करते है। ऐसे में हमें इस समय बच्चों की सही डाइट पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि छोटे बच्चे अभी भी वैक्सीनेटेड नहीं है।

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